Raipur | राज्यों से

चिंतन शिविर 3.0 से छत्तीसगढ़ के विकास को मिलेगी नई दिशा

चिंतन शिविर से निकले विचार बन रहे सुशासन और विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला

सुशासन, तकनीक, कृषि, पर्यटन और विकासपरक राजनीति पर हुआ गहन मंथन पिछले चिंतन शिविरों से मिले सुझावों

रायपुर। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दीर्घकालिक रणनीति, सुशासन को और अधिक प्रभावी बनाने तथा भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप प्रशासनिक क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय 'चिंतन शिविर 3.0' का सफलतापूर्वक समापन हुआ। 

सीएम हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु जैसे नवाचार हुए लागू

 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मंत्रिपरिषद के सदस्यों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तथा देश के प्रतिष्ठित नीति विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों ने शासन, विकास और जनसेवा के विभिन्न आयामों पर व्यापक विचार-विमर्श किया।

 

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि चिंतन शिविर अब केवल विचारों के आदान-प्रदान का मंच नहीं रह गया है, बल्कि शासन व्यवस्था में ठोस सुधारों का प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-संचालित और नागरिकों की आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील प्रशासन विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझाव विकसित छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को नई दिशा देंगे तथा इन्हें शीघ्र ही नीतिगत एवं प्रशासनिक पहलों के रूप में लागू किया जाएगा।

 

दूसरे दिन आयोजित 'सतत समृद्धि के इंजन के रूप में पर्यटन' विषयक सत्र में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं पर्यटन नीति विशेषज्ञ  सुमन बिल्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, जनजातीय और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में देश का अग्रणी हाई-वैल्यू, लो-इम्पैक्ट पर्यटन गंतव्य बनने की अपार क्षमता रखता है। उन्होंने पर्यटन अवसंरचना, सामुदायिक भागीदारी, निवेश, उत्तरदायी पर्यटन और सुशासन आधारित पर्यटन मॉडल पर बल दिया। 

 

उन्होंने विशेष रूप से कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय से छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर क्षेत्र, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बना सकता है। राज्य की औद्योगिक नीति भी पर्यटन निवेश को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

 

दो दिवसीय चिंतन शिविर 3.0 ने सुशासन, नेतृत्व विकास, उभरती प्रौद्योगिकियों, कृषि, पर्यटन तथा विकासपरक राजनीति जैसे विविध विषयों पर राज्य सरकार के दीर्घकालिक विज़न को नई दिशा प्रदान की। विशेषज्ञों के अनुभव, मंत्रिपरिषद के मंथन और प्रशासनिक नेतृत्व के सामूहिक विचारों से प्राप्त सुझाव आने वाले समय में राज्य की नीतियों, प्रशासनिक सुधारों और विकास कार्यक्रमों का आधार बनेंगे। 

 

विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में यह चिंतन शिविर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।