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कवर्धा पीएसीएल चिटफंड घोटाला: ₹29.72 करोड़ की धोखाधड़ी के आरोपी 11 साल बाद गिरफ्तार

कबीरधाम। कम समय में रकम दोगुनी करने के सपने ने जिले के हजारों परिवारों की गाढ़ी कमाई को वर्षों तक अधर में लटका दिया। करीब 11 साल पुराने पीएसीएल चिटफंड प्रकरण में कबीरधाम पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कंपनी से जुड़े दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जिले के 13 हजार से अधिक निवेशकों से लगभग 29.72 करोड़ रुपये जमा कराने और राशि वापस नहीं करने के आरोपों के बीच हुई यह गिरफ्तारी उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो वर्षों से अपनी जमा पूंजी लौटने का इंतजार कर रहे हैं।

कबीरधाम पुलिस ने आरोपियों को उत्तर प्रदेश की उरई जेल से प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया

 

13,275 निवेशकों से जुटाए गए थे 29.72 करोड़

 

पुलिस विवेचना में यह तथ्य सामने आया कि कंपनी द्वारा जिले और आसपास के क्षेत्रों के कुल 13,275 जमाकर्ताओं से लगभग 29 करोड़ 72 लाख 41 हजार 178 रुपये जमा कराए गए थे। निवेशकों को निर्धारित अवधि में मूलधन और ब्याज लौटाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन राशि वापस नहीं होने पर मामला धोखाधड़ी और अमानत में खयानत तक पहुंच गया।



जांच में पहले भी कई बड़े नाम आ चुके हैं सामने

 

इस प्रकरण में पूर्व में कंपनी के संचालक सुखदेव सिंह, तरलोचन सिंह, निर्मल सिंह भंगू, सुब्रतो भट्टाचार्य, अनिल चौधरी, जोगिंदर टाइगर, गुरमीत सिंह, सिकंदर सिंह और नरेंद्र सिंह के विरुद्ध भी न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया जा चुका है। मामले की जांच लगातार जारी रही और नए साक्ष्यों के आधार पर अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी खंगाली जाती रही।

 

उत्तर प्रदेश की जेल से लाए गए दोनों आरोपी

 

जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि मामले से जुड़े आरोपित गुरनाम सिंह और गुरूजंत सिंह गिल उत्तर प्रदेश के जालौन जिले स्थित उरई जेल में निरुद्ध हैं। इसके बाद न्यायालय से प्रोडक्शन वारंट प्राप्त कर विशेष टीम भेजी गई। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों आरोपितों को कबीरधाम लाया गया। पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।



ग्रामीण निवेशकों को सबसे अधिक हुआ नुकसान

 

मामले में बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार प्रभावित हुए हैं। कई लोगों ने खेती-किसानी से हुई बचत, पारिवारिक जरूरतों और भविष्य की योजनाओं के लिए संचित राशि इस कंपनी में निवेश की थी। भुगतान नहीं होने से अनेक परिवार आर्थिक कठिनाइयों का सामना करने को मजबूर हुए। यही कारण है कि यह मामला जिले के सबसे चर्चित चिटफंड मामलों में शामिल रहा है।