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लोरमी। मुंगेली लोरमी के सापरिया परिवार ने 5 जुलाई को समाज के सामने अनुकरणीय मिसाल पेश की। वार्ड 13 निवासी गिरीश भाई सापरिया के निधन के बाद पत्नी वंदना की इच्छा पर उनका नेत्रदान कराया गया। वहीं दोनों बेटियों रिया और हनी ने पिता को मुखाग्नि देकर बेटे का धर्म निभाया और रूढ़िवादी सोच को तोड़ा।

पत्नी की इच्छा पर घर पर ही हुआ सफल नेत्रदान
4 जुलाई को 51 वर्षीय गिरीश भाई सापरिया का निधन हो गया। पत्नी वंदना गिरीश सापरिया ने पति के नेत्रदान की इच्छा जताई।
इस मौके पर कलेक्टर कुंदन कुमार, सीएमएचओ डॉ. शीला शाहा और सिविल सर्जन डॉ. एमके राय के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग की टीम मृतक के घर पहुंची। नोडल अधिकारी डॉ. देवेश खांडे और डीपीएम गिरीश कुर्रे के निर्देशन में सहायक नोडल अधिकारी भक्त सनेही पटेल, नेत्र सहायक अधिकारी दिलेश्वर भास्कर, चंद्रकांति चौबे और नरेंद्र राजपूत ने परिजनों की लिखित सहमति के बाद घर पर ही नेत्र एन्यूक्लिएशन की प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी की।
नेत्रों को बिलासपुर स्थित आई बैंक में सुरक्षित रखने के लिए भेज दिया गया है।
बेटियों ने कांधा दिया और मुखाग्नि देकर तोड़ी परंपरा
मृतक गिरीश सापरिया की दो बेटियां रिया सापरिया और हनी सापरिया ने पुत्र धर्म निभाते हुए समाज को नई दिशा दिखाई।
अंतिम यात्रा में दोनों बेटियों ने पिता की अर्थी को कंधा दिया और मुक्तिधाम में मुखाग्नि भी दी। अर्थी के आगे मृतक के भाई देवेंद्र और टीनू सापरिया ने कंधा दिया तो पीछे दोनों बेटियां चलीं। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
बेटियों ने पिता के सभी अंतिम क्रिया कर्म खुद किए और समाज में बेटे-बेटी में भेदभाव की सोच के खिलाफ सकारात्मक संदेश दिया।
अफसरों ने की सराहना, दिया नेत्रदान का संदेश
जिला चिकित्सालय मुंगेली के अधिकारियों ने मृतक के पिता मोहन भाई सापरिया और पूरे सापरिया परिवार के इस मानवीय निर्णय की सराहना की।
अधिकारियों ने कहा कि मृत्यु के बाद नेत्रदान से दो नेत्रहीन लोगों को नई रोशनी मिल सकती है। उन्होंने लोगों से नेत्रदान का संकल्प लेने और किसी के जीवन में प्रकाश बनने की अपील की।