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निजी स्कूलों को आरटीआई से बड़ी राहत

22 Jun 2026 25 views
निजी स्कूलों को आरटीआई से बड़ी राहत

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निजी शिक्षण संस्थानों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि केवल फीस प्रतिपूर्ति या किसी सरकारी उपक्रम के साथ वित्तीय व्यवस्था होने मात्र से कोई निजी स्कूल सूचना का अधिकार (आरटीआइ) अधिनियम के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं बन जाता। अदालत ने कहा कि किसी संस्था को आरटीआइ के दायरे में लाने के लिए उस पर सरकार का गहरा और व्यापक नियंत्रण अथवा पर्याप्त सरकारी वित्तपोषण होना आवश्यक है। यह फैसला देशभर के निजी और स्व-वित्तपोषित शिक्षण संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की पीठ ने यह फैसला कोरबा स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया। स्कूल प्रबंधन ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआइसी) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें संस्था को सार्वजनिक प्राधिकरण मानते हुए उसके प्राचार्य को ‘डीम्ड पब्लिक इंफार्मेशन आफिसर’ घोषित किया गया था और सूचना उपलब्ध नहीं कराने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था।



मामला एक पूर्व कर्मचारी की सेवा समाप्ति के बाद शुरू हुआ था। कर्मचारी के स्वजन ने आरटीआइ के तहत स्कूल के प्रशासनिक और सेवा संबंधी मामलों की जानकारी मांगी थी। सूचना नहीं मिलने पर मामला केंद्रीय सूचना आयोग पहुंचा, जहां आयोग ने स्कूल को आरटीआई के दायरे में मान लिया था।

 

हाईकोर्ट की नजर में ये थे प्रमुख आधार

 

सुनवाई के दौरान स्कूल प्रबंधन ने तर्क दिया कि संस्था एक निजी और स्व-वित्तपोषित शिक्षण संस्थान है, जिसका संचालन दयानंद एंग्लो वैदिक कालेज ट्रस्ट एंड मैनेजमेंट सोसायटी द्वारा किया जाता है। अदालत ने पाया कि दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसइसीएल) के साथ स्कूल की व्यवस्था केवल कर्मचारियों के बच्चों को रियायती शिक्षा उपलब्ध कराने और उससे होने वाले घाटे की भरपाई तक सीमित है।

 

इसे ‘पर्याप्त वित्तीय सहायता’ नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने सीआइसी का आदेश और जुर्माना निरस्त करते हुए कहा कि आरटीआइ अधिनियम की धारा 2(एच) के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण माने जाने की आवश्यक शर्तें इस मामले में पूरी नहीं होतीं।