एमसीबी। संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय रायपुर छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा 17 से 21 फरवरी तक "आर्कियोलॉजिकल एंड कल्चरल कॉन्टेक्स्ट आफ सरगुजा'' विषय पर पांच दिवसीय कार्यशाला का आयोजन जिला पुरातत्व संघ द्वारा किया गया जिसमें मनेद्रगढ़-चिरमिरी- भरतपुर जिले के पुरातत्व एवं पर्यटन विभाग के नोडल अधिकारी एवं समन्यक/ सदस्य, जिला पुरातत्व संघ एमसीबी, डॉ विनोद कुमार पांडेय को कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ के रूप में व्याख्यान देने हेतु आमंत्रित किया गया।
"मनेंद्रगढ़-चिरमिरी -भरतपुर जिले के पुरास्थल एवं उनका संरक्षण" विषय पर व्याख्यान देते हुए जिले की प्रमुख पुरातत्विक स्थल सीतामढ़ी हरचौका (रामवन गमन पथ), सीतामढ़ी घघरा, घघरा का शिव मंदिर, जटाशंकरी गुफा, गोंडवाना मरीन फॉसिल पार्क, रॉक पेंटिंग, सती मंदिर चिरमिरी, धवलपुर की गढ़ी आदि विषयों पर बोलते हुए उसके महत्व एवं संरक्षण पर प्रकाश डाला, साथ ही जिला प्रशासन द्वारा संरक्षण की दिशा में किये जा रहे कार्यों के बारे में बताया। कोरिया एवं चांगभखार रियासत के ऐतिहासिक महत्व को भी विस्तार पूर्वक बताया।
कार्यशाला का उद्देश्य सरगुजा अंचल के पुरातात्विक विरासत, ऐतिहासिक स्मारकों, महापाषाणीय संस्कृति, जनजातीय संस्कृति, परंपरा के संरक्षण, अभिलेखन एवं संवर्धन के संबंध में जागरूकता एवं क्षमता का विकास करना था।
बता दें कि डॉ पांडेय 25 वर्षों से एमसीबी जिले के पर्यटन एवं पुरातत्व पर कार्य कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर उनके शोध पत्र एवं समाचार पत्रों पर इनके लेख प्रकाशित होते रहे हैं। कई पुरस्कारों से भी सम्मानित हो चुके हैं। वर्तमान में जिले के पुरातत्व एवं पर्यटन विभाग के नोडल अधिकारी तथा शासकीय हाई स्कूल पिपरिया में व्याख्याता के कार्य का निर्वहन कर रहे हैं।
कार्यशाला में प्रमुख रूप से डॉ सचिन मंदिलवार, प्राध्यापक बोधगया विश्वविद्यालय, डॉ अजय पाल सिंह, डॉ विनय तिवारी, अजय कुमार चतुर्वेदी, वाल्मीकि दुबे, डॉ भाग्यश्री दीवान, प्रभात कुमार सिंह पुरातत्वविद, प्रवीण तिर्की, अमर भारद्वाज एवं पुरातत्व विभाग द्वारा पंजीकृत 90 छात्र/ छात्राएं उपस्थित रहे।